Monday, October 15, 2018

मैंने क्यों सेक्स-वर्करों के पास जाना शुरू किया?

बहुत ही यादगार रात थी. 28 साल में मैंने पहली बार किसी महिला को स्पर्श किया था.
इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था कि वो मेरी बीवी नहीं बल्कि एक सेक्स वर्कर थी.
मेरी इच्छाएं पूरी हो रही थीं, इसलिए मैं ख़ुश था.
वो अनुभव एक सप्ताह तक मेरे ज़ेहन में जीवित था.
लग रहा था मानो मैं एक अलग ही दुनिया में हूँ. और ऐसा होता भी क्यों न?री शादी अब तक नहीं हो पाई है. गुजरात के मेरे शहर में पुरुषों के मुक़ाबले औरतों की तादाद कम है.
और इस खाई ने मेरे जैसे तमाम युवकों को शादी से महरूम रखा है.
मेरे माँ-बाप को बहुत कुछ सुनना पड़ता है. जैसे, अगर आपका बेटा सरकारी नौकरी कर रहा होता तो बात कुछ और थी.
लेकिन निजी कंपनी की नौकरी का क्या भरोसा? और आपके पास ज़्यादा ज़मीन भी तो नहीं है.
उस समय मैं महीने में 8,000 रुपये कमाता था. मैं घर में बड़ा बेटा था और शादी कहीं भी तय नहीं हो पा रही थी.
मुझे लगता था कि अगर कहीं भी रिश्ता हो जाता है तो समाज में इज़्ज़त रह जाएगी.
हद तो तब हो गई जब मेरे दोस्त नीरज (बदला हुआ नाम) की शादी हो गई, जबकि वह मुझसे कम पैसे कमाता था.
शायद इसलिए कि नीरज के पिताजी 20 एकड़ ज़मीन के मालिक थे.
हम चार दोस्त थे जो अक्सर शराब पीने के लिए पास के शहर जाया करते थे.
शायद मेरे दोस्त को उस दिन मेरी परेशानी नज़र आ गई थी.
ग्लास में बीयर डालते हुए उसने कहा, "अबे इतना परेशान क्यूँ होता है? चल मेरे साथ! तू अगर शादी कर भी लेगा तो भी इतना मज़ा नहीं आएगा. देख दुनिया कितनी रंगीन है. उसका मज़ा ले यार! तू चल मेरे साथ."
मैं इस ख़याल से ही हैरान था. पर मेरा दोस्त मुझे मनाने में लगा था. आख़िर हम एक होटल में चले ही गए.
मैंने कई ब्लू फिल्में देखी थीं, पर असल ज़िंदगी में किसी औरत के साथ मैं पहली बार था.
फिर क्या था, होटलों में जाना मेरी आदत बन गई. पाँच साल तक ये सिलसिला जारी रहा. ख़ुद को सुकून देने के लिए ये एक आसान रास्ता था.
लेकिन एक दिन मेरे इस राज़ की भनक मेरे पिताजी के कानों तक पहुँच गई. उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया.
हाथ तो उठा नहीं सकते थे, इसलिए चिल्लाकर ख़ुद को शांत करने की कोशिश कर रहे थे.
"तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुए? अपनी माँ और बहन के बारे में तो एक बार सोचा होता. समाज में लोगों को वो क्या मुँह दिखाएंगी?"
माँ और दीदी अलग से रो रही थीं. दीदी के ससुराल वालों को भी ये बात मालूम पड़ गई थी.
मैंने सफ़ाई दी कि दोस्तों ने मुझे शराब पिला दी थी और होटल में ले गए थे. मैं नशे में था इसलिए पता नहीं क्या-क्या हो गया. फिर माफ़ी मांगी कि ग़लती हो गई है.
"तो फिर इतने सालों तक एक ही गलती क्यों दोहराता रहा?"
पिताजी के इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं था.
दीदी और जीजाजी अलग से डांट रहे थे. बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, मानो मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म किया हो. जैसे कि किसी का ख़ून.
तीन दिन तक मेरे पिता जी ने मुझसे बात नहीं की और तीसरे दिन सीधे कहा, "तेरे लिए एक विधवा का रिश्ता है. उसका पाँच साल का बेटा है लेकिन लड़की अच्छे घर से है."
"लड़की के पिताजी को तेरी इन हरकतों के बारे में पता है, लेकिन वो शादी के लिए राज़ी है. बेटा, तेरी भी उम्र हो रही है. तू 31 साल का हो गया है. इस रिश्ते को हाँ कह दे."
"अब तो तू कमाता भी अच्छा है. गृहस्थी बसा, हम भी ख़ुश रहेंगे."
लेकिन मुझे तो कोई और पसंद आ चुकी थी. वो महिला उस होटल में काम करती थी जहाँ मैं सेक्स वर्करों के लिए जाता था.
वो काम तो हाउस-कीपिंग का करती थी. कम पैसे कमाती थी. लेकिन उसमें एक बात थी. वो मुस्कुराती थी तो बला की ख़ूबसूरत लगती थी.
लेकिन वो भी मेरी करतूतों से नाराज़ थी. उसने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया.
जब उसने किसी ओर से शादी कर ली, तो मैं सदमे में चला गया.
मुझे अधूरापन महसूस होने लगा था. ये अधूरापन था किसी के साथ का. जो मेरी भावनाओं को समझे और जीवनभर मेरे साथ रहे. शादीशुदा जीवन की कमी अब खलने लगी थी.
परिवारवालों को भी समाज में घुलने-मिलने में काफ़ी परेशानी हो रही थी. इसलिए मैंने घर छोड़ दिया.
पर दो हफ़्ते बाद ही माँ-बाप के बुलाने पर मैं वापस लौट आया.
मेरी शादी को लेकर सवाल जस के तस थे और परिवार उनसे परेशान रह रहा था.
समाज है ही ऐसा. उसे उन्हीं सवालों में ज़्यादा मज़ा आता है जो सबसे ज़्यादा दुख देते हैं.
इस बार मैंने घर हमेशा के लिए छोड़ने का फ़ैसला कर लिया.
नया शहर, नए लोग पर मेरी आदतें पुरानी रहीं. कभी पड़ोस में रहने वाली औरत तो कभी पास के शहरों में जाकर दिल बहलाया.
कई बार तो मेरे बॉस भी साथ आते थे. उन्हें मुझ पर काफ़ी भरोसा था.
आज मैं 39 साल का हो चुका हूँ लेकिन अकेला महसूस नहीं करता.
शादी के जो सपने संजोए थे, वो बीवी के साथ ना सही, बाकी औरतों के साथ पूरे हो चुके हैं. सब चलता है, ज़िंदगी है.
अब तो परिवारवालों ने भी समझौता कर लिया है. और छोटे भाई ने एक आदिवासी महिला के साथ प्रेम-विवाह कर लिया है.
मैं अब आज़ाद परिंदा हूँ.
शादी का ख़याल मैंने छोड़ दिया है क्योंकि ये 'लाइफ़ स्टाइल' मुझे रास आ रही है.
आज मेरी महीने की तनख़्वाह 40,000 रुपये है. थोड़ा बहुत मैं ऊपर से भी कमा लेता हूँ.
किसी चीज़ की कमी नहीं है इसलिए मन में कोई ग्लानि भी नहीं है.
पता नहीं अगर शादी हुई होती तो ज़िंदगी कैसी होती. लेकिन आज समाज के तानों से मैं कोसों दूर हूँ. मेरी आज़ाद ज़िंदगी काफ़ी बेहतर है.
ये कहानी #HisChoice सिरीज़ की पाँचवी कहानी है. #HisChoice की कहानियों के ज़रिए हमारी कोशिश उन पुरुषों के दिल और दिमाग में झांकने की है जिन्होंने समाज के बनाए एक ख़ास खाँचे में फ़िट होने से इनकार कर दिया.

Monday, October 8, 2018

深圳滑坡事故暴露渣土围城困境

城市建设过程中产生的余泥渣土由于处理不慎,瞬间冲毁33栋民宅和厂房。12月20日11时40分,在没有地震、暴雨等自然灾害诱发的情况下,深圳一处渣土山突然发生大面积滑坡,截至21日失踪人数将近百人。专家鉴定后认为,事故原因是废弃渣土堆得过多过高,且没有防护措施。

这处渣土山位于广东省深圳市的恒泰裕工业园,两年堆起的渣土山有20多层楼高。深圳毗邻香港,属于中国沿海经济发达城市。

国土资源部官方微博20日通报称,初步查明深圳垮塌体为人工堆土,原有山体没有滑动。人工堆土垮塌的地点主要堆放渣土和建筑垃圾,由于堆积量大、堆积坡度过陡,导致失稳垮塌。

据媒体报道,广东省地质环境监测总站专家经现场勘测后称,事故发生地点原是一个老采石场,后作为余泥渣土受纳场使用。虽然事故当天有一点降雨,但理论上并不足以诱发山体滑坡。初步判断主要原因还是渣土堆得过高,且没有防护措施。据估算,滑坡堆土量至少超过10万立方米。

“余泥渣土”是指建造和拆除各类建筑物、道路、管网以及居民装修房屋过程中所产生的弃土、弃料及其他废弃物。

《北京青年报》记者了解到,“渣土山”为当地政府2014年2月合法审批项目,使用期限至2015年2月21日,建设这个临时受纳场的目的是解决困扰深圳的余泥渣土排放难题。与报建手续繁琐、建设周期长的永久受纳场相比,临时受纳场报建手续简单,更易审批通过。

附近居民告诉记者,临时受纳场建成后,几乎每天都有上百辆大卡车运来泥土,很多时候这些卡车甚至会通宵工作,进进出出和倾倒渣土作业时发出的巨大噪音,多次被居民投诉。这些渣土车每车次收费200多元,有专人收费

《北京青年报》报道说,今年1月12日编制完成的相关环评报告曾指出该受纳场存在崩塌滑坡隐患,有潜在的水土流失危害,“危及山体和边坡的安全”,应采取有效的防治措施进行治理。

但这份环评报告并没有引起重视。这次灾害暴露出深圳在城市建设中面临余泥渣土无处可倒困境,忽视和不当处理又引发了灾难的发生。

随着日益增加的轨道交通建设、旧城改造,和遍布深圳的地产开发,深圳开挖的土方大大增加,产生的余泥渣土已远远超过当地处理能力

据报道,深圳市目前年产生建筑废弃物达3000万立方米,相当于300个此次发生灾害的渣土堆规模。2001年后,由于待建地逐步减少、低洼地带基本填平,大型填海工程也基本完成并受到严格管制,深圳的余泥渣土排放平衡在这一阶段被打破,并进入了排放难阶段。

跟北京、上海和广州这三个一线城市相比,深圳面积最小,大量废弃的土料越来越难找到合适的堆放地。据《深圳晚报》2014年10月报道,深圳当时已有12座受纳场,但只能撑一年。市内尚有多条地铁尚未建成,余泥渣土排放难将持续到2020年。

Tuesday, October 2, 2018

इंडोनेशिया भूकंपः अपनी जान देकर सैकड़ों जान बचाने वाला 'हीरो'

डोनेशिया तबाही के दौर से गुज़र रहा है. शुक्रवार को देश में आए 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने कम से कम 844 लोगों की जान ले ली.
शुक्रवार को जब इंडोनेशिया की धरती हिली तो 21 साल के एंथोनियस गुनावान एगुअंग पालू एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर पर तैनात थे. वे बाटिक एयरलाइन के एक विमान को उड़ान भरने की इजाज़त दे रहे थे.
हालात देखते हुए एगुअंग के सहयोगी नियंत्रण टावर छोड़कर बाहर निकल गए, लेकिन वो तब तक वहां बने रहे जब तक विमान ने रनवे से उड़ान नहीं भर ली.
जैसे ही विमान उड़ा भूकंप के झटके तेज़ हो गए. देखते ही देखते नियंत्रण टावर की चार मंजिला इमारत ढह गई. ख़ुद को बचाने के लिए एगुअंग खिड़की से बाहर कूदे जिसकी वजह से उनके पैर, हाथ, पसलियों सहित कई हड्डियां टूट गईं.
उन्हें विमान के ज़रिए अस्पताल ले जाया जाना था, लेकिन विमान के पहुंचने से पहले ही अगुआंग ने दम तोड़ दिया.
इंडोनेशिया के एयर नेविगेशन के प्रवक्ता योहानेस सिरैत ने एबीसी से कहा, ''एगुअंग के फ़ैसले ने सैकड़ों लोगों की ज़िंदगी बचाई.''
इंडोनेशिया के एयर नेविगेशन ने एगुअंग की तस्वीरें ट्विटर पर एक साझा करते हुए उन्हें श्रद्दांजलि दी. इन तस्वीरों में उनके पार्थिव शरीर को इंडोनेशियाई सेना के जवान अंतिम यात्रा के लिए ले जा रहे हैं.
एगुअंग की ये साहस से भरी कहानी इंटरनेट पर छाई हुई है और लोग उन्हें 'हीरो' कह रहे हैं.
बाटिक एयरलाइन के कैप्टन रिकोस्टा मैफ़ैला ने एगुअंग के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनसे हुई उनके अंतिम शब्दों को इंस्टाग्राम पर लिखा.
इंडोनेशिया भूकंप और सुनामी दोनों का दंश झेल रहा है. शुक्रवार को आई इस आपदा में 844 लोग मारे गए हैं. मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है.
अमिताभ बच्चन, सलमान ख़ान और आमिर ख़ान जैसे सितारे इस मसले पर बोलने से साफ़ बच रहे हैं. लेकिन फ़रहान अख़्तर, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर, ट्विंकल खन्ना, प्रियंका चोपड़ा और अनुराग कश्यप जैसे कई सेलिब्रेटी तनुश्री का साथ दे रहे हैं.
फ़िल्म 'आशिक बनाया आपने' से मशहूर हुईं तनुश्री दत्ता के मुताबिक़, हॉर्न ओके प्लीज़ फ़िल्म के दौरान नाना पाटेकर ने उनसे बदसलूकी की थी. नाना पाटेकर की तरफ़ से इस मामले में कोई स्पष्ट सफाई नहीं दी गई है.
तनुश्री दत्ता अब अमरीका में रहती हैं और इन दिनों भारत आई हुई हैं. हालांकि वो लंबे वक़्त से फ़िल्मी दुनिया से दूर हैं. नाना पाटेकर और तनुश्री की 'हॉर्न ओके प्लीज़ ' फ़िल्म 2009 में रिलीज़ हुई थी.
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे भारत का #MeToo अभियान बता रहे हैं. लेकिन फ़िल्म के टॉपिक के हिसाब से अक्सर महिला सुरक्षा की बात करने वाले कुछ बड़े सितारे इस मसले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर रहे हैं.
इनमें पिंक फ़िल्म के दौरान नो मीन्स नो यानी न का मतलब न डॉयलॉग को लगातार दोहराने वाले अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं और टीवी प्रोग्राम त्यमेव जयते के वक़्त महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाले आमिर ख़ान भी.
अमिताभ बच्चन से जब मीडिया ने इस मुद्दे पर सवाल पूछा तो वो बोले- ना ही मेरा नाम तनुश्री दत्ता है और ना ही नाना पाटेकर. मैं कैसे उत्तर दूँ आपके प्रश्न का?
आमिर ख़ान ने इस मसले पर कहा, ''मैं सोचता हूं कि बिना किसी मामले की डिटेल जाने मेरा किसी तरह की कोई बात कहना सही नहीं रहेगा. लेकिन मैं ये ज़रूर कहना चाहूंगा कि अगर ऐसा कहीं भी कुछ होता है तो बहुत उदास करने वाली बात है. लेकिन लोग इस मामले की जांच करेंगे, इसलिए अभी इस पर कुछ नहीं कहना चाहिए.''
सलमान ख़ान ने मीडिया की ओर से इस मसले पर सवाल पूछने पर कहा- मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है. अगर मुझे इस बारे में पता होता तो हम देखते. आप जो बात कर रही हैं, मुझे उस बारे में नहीं मालूम.
सलमान ख़ान ने इस सवाल को पूछने वाली पत्रकार से कहा- आप किस इवेंट में आईं हैं मैडम. जिस इवेंट में आईं हैं, उस इवेंट का सवाल पूछिए न.
इसके बाद हँसते हुए सलमान ख़ान ने कहा- इस सेक्शन को लॉक कर दीजिए, सवाल कहीं और से पूछे जाएं.
ये वो सेक्शन था, जहां बैठकर उस महिला पत्रकार ने सलमान से सवाल पूछा था.
रिचा चड्ढा ने ट्वीट किया, तनुश्री दत्ता का अकेला होना, लोगों का सवाल उठाना दिल दुखाता है. कोई भी महिला ऐसी लोकप्रियता नहीं चाहती है जो विवादों और ट्रोलिंग को जन्म दे. तनुश्री के साथ सेट पर जो हुआ वो ग़लत था.