Tuesday, November 6, 2018

लोगों की हत्या पर केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और

का मामला तूल पकड़ रहा है. इस मामले में बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजेन गोहेन (Union minister Rajen Gohain)  तथा कांग्रेस  सांसद सुष्मिता देव(Congress MP Sushmita Dev ) पर लोगों को भड़काने का आरोप लगा है. जिस पर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है. तिनसुकिया कांड के सिलसिले में असम में दो समुदायों में दरार पैदा करने के मकसद से भड़काऊ बयान देने के आरोप में कुल चार अन्य नेताओं के खिलाफ सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की.पुलिस ने कहा कि एक्स-उल्फा यूनाइटेड प्लैटफॉर्म की बराक इकाई के महासचिव इनामुल हक लश्कर की ओर से सिलचर सदर पुलिस थाने में शिका

यत दाखिल की गई थी.रेल राज्य मंत्री राजेन के अलावा भाजपा विधायक शिलादित्य देव, पार्टी के नेता प्रदीप दत्ता राय, कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव, पार्टी विधायक कामलख्या डे पुरकायस्थ और चंदन सरकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.इन नेताओं के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी में किसी खास बयान का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन आरोप है कि उन्होंने कई मौकों पर भड़काऊ बयान दिए. गुरुवार शाम को असम के तिनसुकिया में धोला पुलिस थाने के तहत आने वाले खेरोनिबाड़ी गांव में पांच बंगाली भाषी लोगों की हत्या कर दी गई थी। इनमें तीन मृतक एक ही परिवार के सदस्य थे.असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को इन हत्याओं के लिए कुछ लोगों एवं संगठनों के भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार माना था. इससे पहले, अस

म विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया ने सोमवार को तिनसुकिया हत्याकांड की न्यायिक जांच कराने की मांग की. (इनपुट भाषा से)देशभर की तरह बॉलीवुड सितारे दीपावली का जश्न मनाने में व्यस्त हैं. हर रात किसी न किसी बड़े सेलेब के घर दीवाली की पार्टी (Pre-Diwali Bash) का आयोजन हो रहा है. इसी बीच रविवार रात एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के प्री-दीवाली बैश में बी-टाउन की तमाम हस्तियां शामिल हुईं. सलमान खान से लेकर प्रीति जिंटा, जैकलीन फर्नांडिस, करण जौहर समेत कई सेलेब्स पार्टी एन्जॉय करते नजर आए. लेकिन हमारी निगाहें सुष्मिता सेन (  सुष्मिता सेन और रोहमन शॉल दोनों ही ब्लैक आउट

फिट में देखे गए. दोनों ने मीडिया के लिए पोज भी दिए, जिसमें इनकी रोमांटिक केमिस्ट्री साफ देखी जा सकती है. बता दें, सुष्मिता और रोहमन में तकरीबन 15 साल का अंदर है. सुष्मिता की उम्र 42 जबकि पेशे से सुपरमॉडल रोहमन 27 साल के हैं. सुष्मिता सेन अक्सर रोहमन के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करती हैं. पिछले महीने वे रोहमन के साथ ताज महल की सैर करने गई थीं.रतलब है कि, साल 1994 में सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स का क्राउन जीतने वाली पहली भारतीय बनी थीं, इस टाइटल से पहले सुष्मिता ने ऐश्वर्या राय को मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में हराया था. मिस यूनिवर्स के तौर पर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के बाद सुष्मिता ने 1996 की फिल्म 'दस्तक' से बॉलीवुड में कदम रखा. 'बीवी नंबर 1', 'मैंने प्यार क्यों किया', 'मैं हूं न', 'फिलहाल', बंगाली फिल्म 'निर्बाक' उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं. साल 2010 से 2013 तक सुष्मिता ने 'आई एम शी' पीजेंट का आयोजन किया, जिसके जरिए मिस यूनिवर्स के लिए भारत के प्रतिनिधि का चयन किया जाता था.) पर जाकर टिकीं जो यहां अकेले नहीं बल्कि अपने कथित बॉयफ्रेंड रोहमन शॉल (  ) के साथ पहुंचीं.

Monday, October 15, 2018

मैंने क्यों सेक्स-वर्करों के पास जाना शुरू किया?

बहुत ही यादगार रात थी. 28 साल में मैंने पहली बार किसी महिला को स्पर्श किया था.
इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था कि वो मेरी बीवी नहीं बल्कि एक सेक्स वर्कर थी.
मेरी इच्छाएं पूरी हो रही थीं, इसलिए मैं ख़ुश था.
वो अनुभव एक सप्ताह तक मेरे ज़ेहन में जीवित था.
लग रहा था मानो मैं एक अलग ही दुनिया में हूँ. और ऐसा होता भी क्यों न?री शादी अब तक नहीं हो पाई है. गुजरात के मेरे शहर में पुरुषों के मुक़ाबले औरतों की तादाद कम है.
और इस खाई ने मेरे जैसे तमाम युवकों को शादी से महरूम रखा है.
मेरे माँ-बाप को बहुत कुछ सुनना पड़ता है. जैसे, अगर आपका बेटा सरकारी नौकरी कर रहा होता तो बात कुछ और थी.
लेकिन निजी कंपनी की नौकरी का क्या भरोसा? और आपके पास ज़्यादा ज़मीन भी तो नहीं है.
उस समय मैं महीने में 8,000 रुपये कमाता था. मैं घर में बड़ा बेटा था और शादी कहीं भी तय नहीं हो पा रही थी.
मुझे लगता था कि अगर कहीं भी रिश्ता हो जाता है तो समाज में इज़्ज़त रह जाएगी.
हद तो तब हो गई जब मेरे दोस्त नीरज (बदला हुआ नाम) की शादी हो गई, जबकि वह मुझसे कम पैसे कमाता था.
शायद इसलिए कि नीरज के पिताजी 20 एकड़ ज़मीन के मालिक थे.
हम चार दोस्त थे जो अक्सर शराब पीने के लिए पास के शहर जाया करते थे.
शायद मेरे दोस्त को उस दिन मेरी परेशानी नज़र आ गई थी.
ग्लास में बीयर डालते हुए उसने कहा, "अबे इतना परेशान क्यूँ होता है? चल मेरे साथ! तू अगर शादी कर भी लेगा तो भी इतना मज़ा नहीं आएगा. देख दुनिया कितनी रंगीन है. उसका मज़ा ले यार! तू चल मेरे साथ."
मैं इस ख़याल से ही हैरान था. पर मेरा दोस्त मुझे मनाने में लगा था. आख़िर हम एक होटल में चले ही गए.
मैंने कई ब्लू फिल्में देखी थीं, पर असल ज़िंदगी में किसी औरत के साथ मैं पहली बार था.
फिर क्या था, होटलों में जाना मेरी आदत बन गई. पाँच साल तक ये सिलसिला जारी रहा. ख़ुद को सुकून देने के लिए ये एक आसान रास्ता था.
लेकिन एक दिन मेरे इस राज़ की भनक मेरे पिताजी के कानों तक पहुँच गई. उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया.
हाथ तो उठा नहीं सकते थे, इसलिए चिल्लाकर ख़ुद को शांत करने की कोशिश कर रहे थे.
"तुझे शर्म नहीं आई ऐसा करते हुए? अपनी माँ और बहन के बारे में तो एक बार सोचा होता. समाज में लोगों को वो क्या मुँह दिखाएंगी?"
माँ और दीदी अलग से रो रही थीं. दीदी के ससुराल वालों को भी ये बात मालूम पड़ गई थी.
मैंने सफ़ाई दी कि दोस्तों ने मुझे शराब पिला दी थी और होटल में ले गए थे. मैं नशे में था इसलिए पता नहीं क्या-क्या हो गया. फिर माफ़ी मांगी कि ग़लती हो गई है.
"तो फिर इतने सालों तक एक ही गलती क्यों दोहराता रहा?"
पिताजी के इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं था.
दीदी और जीजाजी अलग से डांट रहे थे. बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, मानो मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म किया हो. जैसे कि किसी का ख़ून.
तीन दिन तक मेरे पिता जी ने मुझसे बात नहीं की और तीसरे दिन सीधे कहा, "तेरे लिए एक विधवा का रिश्ता है. उसका पाँच साल का बेटा है लेकिन लड़की अच्छे घर से है."
"लड़की के पिताजी को तेरी इन हरकतों के बारे में पता है, लेकिन वो शादी के लिए राज़ी है. बेटा, तेरी भी उम्र हो रही है. तू 31 साल का हो गया है. इस रिश्ते को हाँ कह दे."
"अब तो तू कमाता भी अच्छा है. गृहस्थी बसा, हम भी ख़ुश रहेंगे."
लेकिन मुझे तो कोई और पसंद आ चुकी थी. वो महिला उस होटल में काम करती थी जहाँ मैं सेक्स वर्करों के लिए जाता था.
वो काम तो हाउस-कीपिंग का करती थी. कम पैसे कमाती थी. लेकिन उसमें एक बात थी. वो मुस्कुराती थी तो बला की ख़ूबसूरत लगती थी.
लेकिन वो भी मेरी करतूतों से नाराज़ थी. उसने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया.
जब उसने किसी ओर से शादी कर ली, तो मैं सदमे में चला गया.
मुझे अधूरापन महसूस होने लगा था. ये अधूरापन था किसी के साथ का. जो मेरी भावनाओं को समझे और जीवनभर मेरे साथ रहे. शादीशुदा जीवन की कमी अब खलने लगी थी.
परिवारवालों को भी समाज में घुलने-मिलने में काफ़ी परेशानी हो रही थी. इसलिए मैंने घर छोड़ दिया.
पर दो हफ़्ते बाद ही माँ-बाप के बुलाने पर मैं वापस लौट आया.
मेरी शादी को लेकर सवाल जस के तस थे और परिवार उनसे परेशान रह रहा था.
समाज है ही ऐसा. उसे उन्हीं सवालों में ज़्यादा मज़ा आता है जो सबसे ज़्यादा दुख देते हैं.
इस बार मैंने घर हमेशा के लिए छोड़ने का फ़ैसला कर लिया.
नया शहर, नए लोग पर मेरी आदतें पुरानी रहीं. कभी पड़ोस में रहने वाली औरत तो कभी पास के शहरों में जाकर दिल बहलाया.
कई बार तो मेरे बॉस भी साथ आते थे. उन्हें मुझ पर काफ़ी भरोसा था.
आज मैं 39 साल का हो चुका हूँ लेकिन अकेला महसूस नहीं करता.
शादी के जो सपने संजोए थे, वो बीवी के साथ ना सही, बाकी औरतों के साथ पूरे हो चुके हैं. सब चलता है, ज़िंदगी है.
अब तो परिवारवालों ने भी समझौता कर लिया है. और छोटे भाई ने एक आदिवासी महिला के साथ प्रेम-विवाह कर लिया है.
मैं अब आज़ाद परिंदा हूँ.
शादी का ख़याल मैंने छोड़ दिया है क्योंकि ये 'लाइफ़ स्टाइल' मुझे रास आ रही है.
आज मेरी महीने की तनख़्वाह 40,000 रुपये है. थोड़ा बहुत मैं ऊपर से भी कमा लेता हूँ.
किसी चीज़ की कमी नहीं है इसलिए मन में कोई ग्लानि भी नहीं है.
पता नहीं अगर शादी हुई होती तो ज़िंदगी कैसी होती. लेकिन आज समाज के तानों से मैं कोसों दूर हूँ. मेरी आज़ाद ज़िंदगी काफ़ी बेहतर है.
ये कहानी #HisChoice सिरीज़ की पाँचवी कहानी है. #HisChoice की कहानियों के ज़रिए हमारी कोशिश उन पुरुषों के दिल और दिमाग में झांकने की है जिन्होंने समाज के बनाए एक ख़ास खाँचे में फ़िट होने से इनकार कर दिया.

Monday, October 8, 2018

深圳滑坡事故暴露渣土围城困境

城市建设过程中产生的余泥渣土由于处理不慎,瞬间冲毁33栋民宅和厂房。12月20日11时40分,在没有地震、暴雨等自然灾害诱发的情况下,深圳一处渣土山突然发生大面积滑坡,截至21日失踪人数将近百人。专家鉴定后认为,事故原因是废弃渣土堆得过多过高,且没有防护措施。

这处渣土山位于广东省深圳市的恒泰裕工业园,两年堆起的渣土山有20多层楼高。深圳毗邻香港,属于中国沿海经济发达城市。

国土资源部官方微博20日通报称,初步查明深圳垮塌体为人工堆土,原有山体没有滑动。人工堆土垮塌的地点主要堆放渣土和建筑垃圾,由于堆积量大、堆积坡度过陡,导致失稳垮塌。

据媒体报道,广东省地质环境监测总站专家经现场勘测后称,事故发生地点原是一个老采石场,后作为余泥渣土受纳场使用。虽然事故当天有一点降雨,但理论上并不足以诱发山体滑坡。初步判断主要原因还是渣土堆得过高,且没有防护措施。据估算,滑坡堆土量至少超过10万立方米。

“余泥渣土”是指建造和拆除各类建筑物、道路、管网以及居民装修房屋过程中所产生的弃土、弃料及其他废弃物。

《北京青年报》记者了解到,“渣土山”为当地政府2014年2月合法审批项目,使用期限至2015年2月21日,建设这个临时受纳场的目的是解决困扰深圳的余泥渣土排放难题。与报建手续繁琐、建设周期长的永久受纳场相比,临时受纳场报建手续简单,更易审批通过。

附近居民告诉记者,临时受纳场建成后,几乎每天都有上百辆大卡车运来泥土,很多时候这些卡车甚至会通宵工作,进进出出和倾倒渣土作业时发出的巨大噪音,多次被居民投诉。这些渣土车每车次收费200多元,有专人收费

《北京青年报》报道说,今年1月12日编制完成的相关环评报告曾指出该受纳场存在崩塌滑坡隐患,有潜在的水土流失危害,“危及山体和边坡的安全”,应采取有效的防治措施进行治理。

但这份环评报告并没有引起重视。这次灾害暴露出深圳在城市建设中面临余泥渣土无处可倒困境,忽视和不当处理又引发了灾难的发生。

随着日益增加的轨道交通建设、旧城改造,和遍布深圳的地产开发,深圳开挖的土方大大增加,产生的余泥渣土已远远超过当地处理能力

据报道,深圳市目前年产生建筑废弃物达3000万立方米,相当于300个此次发生灾害的渣土堆规模。2001年后,由于待建地逐步减少、低洼地带基本填平,大型填海工程也基本完成并受到严格管制,深圳的余泥渣土排放平衡在这一阶段被打破,并进入了排放难阶段。

跟北京、上海和广州这三个一线城市相比,深圳面积最小,大量废弃的土料越来越难找到合适的堆放地。据《深圳晚报》2014年10月报道,深圳当时已有12座受纳场,但只能撑一年。市内尚有多条地铁尚未建成,余泥渣土排放难将持续到2020年。

Tuesday, October 2, 2018

इंडोनेशिया भूकंपः अपनी जान देकर सैकड़ों जान बचाने वाला 'हीरो'

डोनेशिया तबाही के दौर से गुज़र रहा है. शुक्रवार को देश में आए 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने कम से कम 844 लोगों की जान ले ली.
शुक्रवार को जब इंडोनेशिया की धरती हिली तो 21 साल के एंथोनियस गुनावान एगुअंग पालू एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर पर तैनात थे. वे बाटिक एयरलाइन के एक विमान को उड़ान भरने की इजाज़त दे रहे थे.
हालात देखते हुए एगुअंग के सहयोगी नियंत्रण टावर छोड़कर बाहर निकल गए, लेकिन वो तब तक वहां बने रहे जब तक विमान ने रनवे से उड़ान नहीं भर ली.
जैसे ही विमान उड़ा भूकंप के झटके तेज़ हो गए. देखते ही देखते नियंत्रण टावर की चार मंजिला इमारत ढह गई. ख़ुद को बचाने के लिए एगुअंग खिड़की से बाहर कूदे जिसकी वजह से उनके पैर, हाथ, पसलियों सहित कई हड्डियां टूट गईं.
उन्हें विमान के ज़रिए अस्पताल ले जाया जाना था, लेकिन विमान के पहुंचने से पहले ही अगुआंग ने दम तोड़ दिया.
इंडोनेशिया के एयर नेविगेशन के प्रवक्ता योहानेस सिरैत ने एबीसी से कहा, ''एगुअंग के फ़ैसले ने सैकड़ों लोगों की ज़िंदगी बचाई.''
इंडोनेशिया के एयर नेविगेशन ने एगुअंग की तस्वीरें ट्विटर पर एक साझा करते हुए उन्हें श्रद्दांजलि दी. इन तस्वीरों में उनके पार्थिव शरीर को इंडोनेशियाई सेना के जवान अंतिम यात्रा के लिए ले जा रहे हैं.
एगुअंग की ये साहस से भरी कहानी इंटरनेट पर छाई हुई है और लोग उन्हें 'हीरो' कह रहे हैं.
बाटिक एयरलाइन के कैप्टन रिकोस्टा मैफ़ैला ने एगुअंग के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनसे हुई उनके अंतिम शब्दों को इंस्टाग्राम पर लिखा.
इंडोनेशिया भूकंप और सुनामी दोनों का दंश झेल रहा है. शुक्रवार को आई इस आपदा में 844 लोग मारे गए हैं. मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है.
अमिताभ बच्चन, सलमान ख़ान और आमिर ख़ान जैसे सितारे इस मसले पर बोलने से साफ़ बच रहे हैं. लेकिन फ़रहान अख़्तर, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर, ट्विंकल खन्ना, प्रियंका चोपड़ा और अनुराग कश्यप जैसे कई सेलिब्रेटी तनुश्री का साथ दे रहे हैं.
फ़िल्म 'आशिक बनाया आपने' से मशहूर हुईं तनुश्री दत्ता के मुताबिक़, हॉर्न ओके प्लीज़ फ़िल्म के दौरान नाना पाटेकर ने उनसे बदसलूकी की थी. नाना पाटेकर की तरफ़ से इस मामले में कोई स्पष्ट सफाई नहीं दी गई है.
तनुश्री दत्ता अब अमरीका में रहती हैं और इन दिनों भारत आई हुई हैं. हालांकि वो लंबे वक़्त से फ़िल्मी दुनिया से दूर हैं. नाना पाटेकर और तनुश्री की 'हॉर्न ओके प्लीज़ ' फ़िल्म 2009 में रिलीज़ हुई थी.
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे भारत का #MeToo अभियान बता रहे हैं. लेकिन फ़िल्म के टॉपिक के हिसाब से अक्सर महिला सुरक्षा की बात करने वाले कुछ बड़े सितारे इस मसले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर रहे हैं.
इनमें पिंक फ़िल्म के दौरान नो मीन्स नो यानी न का मतलब न डॉयलॉग को लगातार दोहराने वाले अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं और टीवी प्रोग्राम त्यमेव जयते के वक़्त महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाले आमिर ख़ान भी.
अमिताभ बच्चन से जब मीडिया ने इस मुद्दे पर सवाल पूछा तो वो बोले- ना ही मेरा नाम तनुश्री दत्ता है और ना ही नाना पाटेकर. मैं कैसे उत्तर दूँ आपके प्रश्न का?
आमिर ख़ान ने इस मसले पर कहा, ''मैं सोचता हूं कि बिना किसी मामले की डिटेल जाने मेरा किसी तरह की कोई बात कहना सही नहीं रहेगा. लेकिन मैं ये ज़रूर कहना चाहूंगा कि अगर ऐसा कहीं भी कुछ होता है तो बहुत उदास करने वाली बात है. लेकिन लोग इस मामले की जांच करेंगे, इसलिए अभी इस पर कुछ नहीं कहना चाहिए.''
सलमान ख़ान ने मीडिया की ओर से इस मसले पर सवाल पूछने पर कहा- मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है. अगर मुझे इस बारे में पता होता तो हम देखते. आप जो बात कर रही हैं, मुझे उस बारे में नहीं मालूम.
सलमान ख़ान ने इस सवाल को पूछने वाली पत्रकार से कहा- आप किस इवेंट में आईं हैं मैडम. जिस इवेंट में आईं हैं, उस इवेंट का सवाल पूछिए न.
इसके बाद हँसते हुए सलमान ख़ान ने कहा- इस सेक्शन को लॉक कर दीजिए, सवाल कहीं और से पूछे जाएं.
ये वो सेक्शन था, जहां बैठकर उस महिला पत्रकार ने सलमान से सवाल पूछा था.
रिचा चड्ढा ने ट्वीट किया, तनुश्री दत्ता का अकेला होना, लोगों का सवाल उठाना दिल दुखाता है. कोई भी महिला ऐसी लोकप्रियता नहीं चाहती है जो विवादों और ट्रोलिंग को जन्म दे. तनुश्री के साथ सेट पर जो हुआ वो ग़लत था.

Monday, September 10, 2018

मुरली मनोहर जोशी उस बैठक के लिए गोवा गए थे

और उन्होंने भाजपा की लीडरशिप को बदलते देखा था.
ये वही बैठक थी जिसमें नरेंद्र मोदी को 2014 के आम चुनावों के लिए चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख बनाया गया.
इसके बाद से जो हुआ वो ज़्यादा पुराना इतिहास नहीं है. नरेंद्र मोदी ने धुआंधार तरीके से चुनाव जीता और पीएम बने.
उनके पुराने और 'विश्वासपात्र' गृह मंत्री रहे अमित शाह को भाजपा की कमान सौंपी गई और बिहार-दिल्ली छोड़ भाजपा ने देश में तमाम विधानसभा चुनाव जीते.
लेकिन इस प्रक्रिया में तीन लोग ऐसे भी थे जो पार्टी से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से दूर जा रहे थे.
पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और सुल्तानपुर के सांसद और संजय गाँधी के बेटे वरुण गाँधी.
लंबे समय तक मोदी सरकार की वित्तीय और विदेश नीति को ग़लत ठहराने के बाद मौजूदा केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के पिता यशवंत सिन्हा ने इसी वर्ष भाजपा त्याग दी.
लेकिन दो ऐसे लोग हैं जिनके बारे में भारतीय जनता पार्टी आज भी असमंजस में हैवरुण गाँधी और शत्रुघ्न सिन्हा वे दो सांसद हैं जिनका पार्टी में भविष्य किसी को नहीं पता.
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान भाजपा के एक केंद्रीय नेता ने कहा, "आज भाजपा जितनी सफल और बड़े पैमाने पर फैली हुई है उसमें बेवजह विरोध करने वालों के लिए जगह कहाँ है?"
लेकिन जिस शाम अमित शाह राष्ट्रीय कार्यकारिणी में "बूथ जीतो, चुनाव जीतो" वाला मंत्र दोहरा रहे थे, उस समय शत्रुघ्न सिन्हा और यशवंत सिन्हा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बगल में बैठे हुए आम आदमी पार्टी की एक रैली में शिरकत कर रहे थे.
इसके एक शाम पहले भाजपा सरकार की केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी के पुत्र और सांसद वरुण गाँधी अम्बाला की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों को युवा शक्ति पर भाषण दे रहे थे.
भाजपा को लंबे समय से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार शेखर अय्यर के मुताबिक़, "पार्टी इन्हें हीरो बनाने के मूड में बिल्कुल नहीं है".
उन्होंने कहा, "यशवंत सिन्हा तो ख़ुद अलग हो गए. शत्रुघ्न सिन्हा कभी आप तो कभी आरजेडी वगैरह के साथ दिखते हैं और सरकार के ख़िलाफ़ कुछ बोल जाते हैं. वरुण खुल कर तो कुछ नहीं बोलते, लेकिन थोड़ा अलग-थलग ज़रूर दिखते हैं. असल बात ये है कि भाजपा दोनों में से किसी के ख़िलाफ़ एक्शन लेकर उन्हें हीरो नहीं बनाना चाहती.बात शत्रुघ्न सिन्हा की हो तो वे एक लंबे समय से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कैबिनेट के ख़िलाफ़ 'मसखरी भरे' लेकिन चुभने वाले ट्वीट करते रहे हैं.
मिसाल के तौर पर संसद सत्र के दौरान मोदी की विदेश यात्रा पर उन्होंने ट्वीट किया था, "आसमान फट नहीं जाता अगर पीएम संसद सत्र पूरा होने के बाद अफ़्रीका जाते."
कर्नाटक विधान सभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि, "प्रधानमंत्री बनने से कोई देश का सबसे ज्ञानी नहीं बन जाता."
ऐसे दर्जनों उदाहरण मिल जाएंगे जिनका निष्कर्ष यही निकलता है कि मौजूदा भाजपा में न तो शत्रुघ्न सिन्हा के लिए कोई ख़़ास जगह है और न ही शत्रुघ्न सिन्हा के दिल में मौजूदा भाजपा नेतृत्व के प्रति.
रविवार को ही भाजपा के केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने सिन्हा को '​सभी का मंच शेयर कर लेने वाला​' बताया.
हालाँकि शत्रुघ्न सिन्हा से ही मिलता-जुलता एक उदाहरण पूर्व भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू भी हैं, लेकिन वे पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और फ़िलहाल पंजाब कैबिनेट में मंत्री हैं.
लेकिन वरुण गाँधी के रवैये से हमेशा यही लगा है कि वे अपनी ही पार्टी की सरकार से नाख़ुश हैं.
वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामशेषन के मुताबिक़, "भाजपा में वरुण की जगह उस दिन से सिमटनी शुरू हो गई थी जिस दिन से पार्टी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पूरे प्रभाव में आई."
उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने हाल ही में बताया था कि, @कुछ दिन पहले लखनऊ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वरुण ने किसी शीर्ष नेता का नाम लिए बिना सरकारी नीतियों की धाज्जियाँ उड़ा दी थीं.'
दरअसल वरुण ने अपने परदादा जवाहरलाल नेहरू की तारीफ़ करने के अलावा देश में किसानों का ख़स्ताहाल और एक बड़े उद्योगपति का बैंक कर्ज़ा चुकाए बिना देश से निकल जाने की निंदा की थी.
हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. वैसे भी 2017 की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी इलाहाबाद में हुई थी और पार्टी के कुछ नेताओं ने मुझसे 'वरुण के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल" होने की बात कही थी.
इलाहाबाद हवाई अड्डे से लेकर बैठक के स्थान तक रातोंरात वरुण गाँधी की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के पोस्टर भी लगे मिले थे.
जब चुनाव आए तो वरुण को "प्रचार तक के लिए नहीं कहा गया".
बहरहाल, रविवार को वरुण गाँधी से बात नहीं हो सकी क्योंकि अम्बाला से लौटने के बाद उनकी 'तबीयत थोड़ी ढीली" है और सोमवार को उन्हें एक और एक और सम्बोधन देने भोपाल निकलना है.
सवाल बड़ा लगता है कि आखिर वरुण और शत्रुघ्न भाजपा की इस अहम बैठक में क्यों नहीं गए.
शत्रुघ्न सिन्हा ने तो अरविन्द केजरीवाल के साथ मंच पर बैठ कर अपना जवाब फिर से देने की कोशिश की है.
वरुण शायद अगले आम चुनावों तक अपने पत्ते न खोलने का मन बनाकर बैठे हैं.

Friday, September 7, 2018

研究证明中国植物二氧化碳的功用

据路透社报道,发表在《自然》杂志上的一项来自北京大学的研究第一次评估出中国的植物对抵消二氧化碳排放的影响。研究指出,二十世纪后期,中国的森林和其他植被吸收了该国约三分之一的温室气体,但科学家认为工业废气排放的激增将导致这项数据的下降。

该份中国研究报告称,在上个世纪八十和九十年代,夏季雨量的增多、森林培育的工作、灌丛的扩大、农作物使用方式的改变和竹子的增多吸收了28 %至37 %的工业废气。研究还发现,中国的植物和土壤每平方米吸收二氧化碳的能力高于欧洲,但低于美国。

然而美国普渡大学的碳研究专家凯文·罗伯特·格尔尼指出,中国经济快速的增长意味着中国碳排放量的增加速度超过了植被的扩大速度,因此植被吸收废气的比例正在下降。 他形容这个比例“正像岩石一样向下坠落。”

格尔尼告诉路透社的记者,2007年,植被应该只抵消了10% 至15 %的中国废气排放。《国际能源机构》预测到2030年,中国的能源消耗将使这一数字降低至6 %至8 %,假如植被吸收水平保持稳定。

格尔尼肯定了这项研究帮助他们了解具有14 %的森林覆盖率的中国。他说:“直到现在, 我们才较好地掌握中国的气体排放情况。
据《新科学家》杂志报道,来自80个国家的数百个土著民族在阿拉斯加的安克雷奇举行的首脑会议,将在本周内对气候变化问题建立一致立场。与会者寻求官方的回答,并希望在哥本哈根即将举行的就2012年后温室气体排放的会议上,各国政府能协商达成共识。


该杂志声称,在会议对土著人历史上适应变化的强调下,土著团体担心被富裕国家践踏,因此寻求通过管理土著人的土地,达到减少温室气体排放量的目的。


该高峰会议主席、环北极因纽特人大会的领导帕特里夏·科克伦表示:“土著居民极少加剧气候变化,却几乎要遭受最沉重的打击。”
 
在北极地区,人们受到诸如风暴浪潮、海冰消失以及冻土消融之类的事件影响程度不一。一项国际自然资源保护联盟2008年的报告发现,土著居民居住在边缘地带,最易遭受诸如干旱和海平面上升等气候变化的影响

但是与此同时,土著居民却倍感缺少政治和土地权力,国家政府也并不为他们的利益服务。婆罗洲的丛林居民和喀麦隆的侏儒族担心他们会被森林砍伐者掠夺。这些丛林开发者通过砍伐和移植树木来攫取碳交换额度。其他一些土著居民已经被外国公司迁移,这类外国公司强占所谓“未被拥有”的土地,用以种植生物燃料作物或植树以“抵消”其他地区的化石燃料排放。

Tuesday, September 4, 2018

一次空前的和平抵抗

在围绕着对许多商业行为及其供应链的投诉和反诉大潮中,无论是全球范围,还是国家和地区,安德森和他的地毯公司的故事相信会引发人们一些深思。。
 
1994年,安德森是(英特飞,总部位于美国乔治亚州的一个重要方块地毯贸易公司)的负责人。当年,尽管越来越多的顾客开始询问公司的环保成效,但是安德森并没有过多考虑他那与石油化工品紧密联系的生意会对环境造成负面影响。
 
在不知道如何应对消费者新诉求的情况下,,安德森阅读了环境学年出版。后来他说,这本书如醍醐灌顶。英安德森的讣告中引用了他的话:“我目瞪口呆,工业体系对环境的影响如此巨大,而我却知之甚少。我开始重新定义‘成功’,而且潜意识中确定了遗产的概念。我以前是地球破坏者,但那不是我想留给后人的。
 
很快安德森宣布了一个新的企业目标:“最终不向地球索取无法自然、迅速再生的东西”。他“我想要Interface(一个石油密集型的公司,你可以把它看作是石油化工也的延伸)成为历史上第一个真正可持续的企业——关闭烟囱,封堵污染管道,不污染环境,不拿走地球上不易再生的物质。”
 
根据公司:“我们将竭力尊敬我们的生意之地,成为工业生态第一人,一个珍爱自然、回归环境的企业。Interface将成为典范,并通过包括利益在内的结果得到验证,使世界成为一个比我们开始时更好的地方,通过我们在全球的影响力我们将起到恢复作用。
 
自开展来,公司如今仍继续向2020年之前达到对环境无负面影响安德森在2009年时说Interface已经完成了1996年来已降低75%的水资源使用,减少了44%的温室气体排放以及削减了43%的能源使用。公司还把其欧洲的工厂改造成使用100%可再生能源发电,从可回收物品生产36%的产品(比1996年上升0.5%)。但是公司仍面对着诸多挑战,包括进一步增加原材料物原材料的比例,以达到地毯产品的
 
就如,“零污染任务”是“主流工业企业的极端途径,特别是在1990年代中期,相比那些标榜‘商业道德’的小规模公司宣扬的理念,‘零污染任务’更加雄心勃勃。”
 
安德森在构想一家更安全、更健康公司的过程中,曾向多位思想家和设计师咨询过建议,其中一位便是著名的“绿色建筑师”威廉·麦克唐。麦克唐纳在2007年写道:“让他独具一格的是安德森很早就以十分公开的方式表达对自己企业负责的允诺。他冒着Interface和自己的声誉风险,定下2020年之前根除公司对环境负面影响的目标。绝大多数董事长所避开的那些对环境的测量和评估,他都一一鼓励。”
 
今年年初,评议:“在企业界没有其他人如此用心地对待可持续发展的重要课程,并且将其实践。”在经商过程中,安德森体会到,在经济和环境之间二选一是“错误”的,“这两者可以兼具,而且缺一不可”。
是加拿大石油公司 规划的一条长达1661英里(约2673千米)的石油管道。该石油管道将承担从加拿大艾贝塔向美国德克萨斯州的石油运输。 声称这条管道将给美国经济带来200亿美金的收益,并在2011至2012年间创造20000份工作岗位
美国交通部称“管道是运输能源产物最安全、可靠、有效率的方式”。然而,环保激进分子指出沥青砂油的生产(也就是 管道运输的石油类型)比传统石油勘探释放的二氧化碳多三倍。另外,操作沥青砂所生产的每桶石油会消耗并污染将近3加仑水。这个项目也将使美国最大的蓄水层欧格拉蓄水层遭到威胁。该蓄水层提供了200万美国人民的饮用水并灌溉了美国25%的农业用地。
抗议者们还考虑到了管道项目引发的社会不公正问题:较为贫穷的社区将受到更多管道建设带来的危害。Keystone XL会经过美国中部的低收入社区,那里的居民可能没有能力搬家。内布拉斯卡林肯大学对Keystone XL管道的分析报告估测该管道每年将会发生1.82次漏油,也就是在50年中发生91次漏油(多于50桶油)。然而,今年5月, 的 I管道发生了本年中的第12次漏油。这也表明管道周边贫穷的社区和脆弱的生态系统可能面临管道引起的持续性破坏。
詹姆士•汉森,美国国家航空和宇宙航行局格达德宇宙研究所所长,和其他科学家们在8月3日写给白宫的一封信中强调,由于沥青砂石油提取会造成的能源浪费和污染,这条管道不符合国家利益,也不符合整个星球的利益。汉森也是本周被逮捕的抗议者之一。
可是,奥巴马政府在8月26日仍然批准了Keystone XL管道的建设,并发布了美国国务院针对Keystone XL管道规划的最终环境影响声明。
现在奥巴马政府正面临对此决定接受公众评论的90天复审阶段。抗议者们在对奥巴马的最终决定下注,希望他会对Keystone XL说不,而不是与他投资清洁能源、减少碳排放量的竞选承诺背道而驰。

Friday, August 31, 2018

अक्षय कुमार ने की केरल की मदद,प्रियंका-निक पर जोक्स वायरल

अक्षय कुमार और फिल्म निर्माता प्रियदर्शन ने बाढ़ प्रभावित केरल की मदद के लिए आगे आए, किया दान. वहीं निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा पर बने जोक्स हो रहे हैं वायरल. देखें मनोरंजन में और क्या रहा खास...
बाढ़ग्रस्त केरल की मदद के लिए आगे आए अक्षय, दिया दान
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार और फिल्म निर्माता प्रियदर्शन ने बाढ़ प्रभावित केरल की मदद के लिए मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में दान किया है. अक्सर समाजि‍क मुद्दों और आपदाओं में अपने योगदान के लिए आगे आने वाले अक्षय कुमार ने केरल के सीएम को बाढ़ग्रस्त केरल की मदद के लिए चेक दिया है.
1 साल पुरानी ड्रेस पहनकर प्र‍ियंका की सगाई पर पहुंची थी परिणीति
प्र‍ियंका चोपड़ा-न‍िक जोनस की सगाई शन‍िवार शाम मुंबई में हुई, इस पार्टी में न‍िक-प्र‍ियंका दोनों की पूरी फैमिली साथ नजर आई. इस पार्टी के बाद प्र‍ियंका की बहन एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने सोशल मीड‍िया पर इमोशनल पोस्ट ल‍िखा. लेकिन परिणीति की पोस्ट से ज्यादा उनकी पार्टी ड्रेस चर्चा में है.
प्रियंका-निक के रोका सेरेमनी पर सोशल मीडिया पर छाए जोक्स
बॉलीवुड में कोई खास इवेंट हो और इंटरनेट जेनरेशन उस पर चुटकी ना ले ये हो नहीं सकता. इस बार निशाने पर प्रियंका चोपड़ा और निक की रोका सेरेमनी की तस्वीरें रहीं. जहां इस कपल का रिलेशनशिप ऑफिशियल होने पर दुनियाभर से बधाई मिली वहीं फनी रिएक्शन भी खूब शेयर हुए. जैसे कि रोका सेरेमनी की इस तस्वीर में अनुष्का के फिल्म सुई धागा के लुक को एडिट कर इस्तेमाल किया गया है.
'निक को पागलों की तरह प्यार करती हैं प्रियंका': परि‍णीति
प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस को उनके रोके पर दुनियाभर से कई फैन्स और सेलेब्स के बधाई संदेश और शुभकामनाएं मिल रही हैं. प्रियंका के रोका सेरेमनी का हिस्सा बनीं उनकी कजिन बहन परिणीति चोपड़ा ने भी प्रियंका और निक के लिए एक इमोशनल पोस्ट लिखकर बधाई दी है.
सत्यमेव जयते का बिजनेस 50 करोड़ के करीब, गोल्ड अब भी आगे
बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम, मनोज बाजपेई, आएशा शर्मा और अमृता खानविलकर स्टारर फिल्म सत्यमेव जयते बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन कर रही है. 15 अगस्त को रिलीज हुई मिलाप जावेरी निर्देशित यह फिल्म 50 करोड़ का आंकड़ा छूने वाली है. फिल्म का अब तक का कुल कलेक्शन 46 करोड़ 55 लाख रुपये हो चुका है. उम्मीद है कि रविवार के बिजनेस के बाद इसका कुल कलेक्शन 50 करोड़ से ऊपर चला जाएगा.
अक्षय के बाद केरल की मदद को आगे आए शाहरुख खान, द‍िए 21 लाख रुपये
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार, फिल्म निर्माता प्रियदर्शन के बाद बाढ़ प्रभावित केरल की मदद के लिए शाहरुख खान ने हाथ बढ़ाया है. डीएनए की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक किंग खान के मीर फाउंडेशन ने 21 लाख रुपये राहतकोष में द‍िए हैं. केरल में बारिश और बाढ़ के कारण रविवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 370 पहुंच गई है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से देश में शोक की लहर है. उन्हें पूरे देश भर में श्रद्धांजलि दी जा रही है. इसी कड़ी में औरंगाबाद महानगर पालिका में भी श्रद्धांजलि का प्रस्ताव लाया गया, जिसका असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी  के पार्षद सैयद मतीन ने विरोध किया तो इस बात से बीजेपी पार्षद नाराज हो गए और उनकी दौड़ा -दौड़कर पिटाई कर दी. इस घटना के बाद सभी पार्षदों ने सैयद मतीन को निलंबित करने की मांग की है. 
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से चार साल पहले दिल्ली के कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित उनके घर पर एक शख्स ने आखिरी सांस ली, लेकिन उस वक्त मीडिया का जमघट नहीं था और यह तारीख थी 3 मई 2014. हालांकि उस दौरान घर पर कई प्रमुख दिग्गज हस्तियां पहुंचीं, जिनमें कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल थीं.
तब 2014 लोकसभा चुनाव के प्रचार में व्यस्त होने की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वाजपेयी की करीबी मिसेज कॉल को श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंच सके थे. लंबे समय तक वाजपेयी के साथ रहीं मिसेज कौल के अंतिम संस्कार में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, अमित शाह के साथ-साथ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए थे.
बता दें कि साल 2014 में राजकुमारी कौल का दिल का दौरा पड़ने की वजह से निधन हो गया था. उनकी मौत से एक ऐसी दोस्ती का अंत हुआ, जो भारतीय राजनीति में पहले शायद ही कभी देखी गई हो. राजकुमारी कौल कई दशकों तक अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रहीं. वाजपेयी ने उनकी बेटी नमिता भट्टाचार्य को भी गोद लिया. वो कई साल तक साथ ही रहीं. वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने तक.
कौन थीं मिसेज कौल?
पिछले हफ्ते 16 अगस्त को शाम पांच बजकर पांच बजे जब वाजपेयी का देहांत हुआ तो राजकुमारी कौल की कहानी भी चर्चा का विषय बन गई. इस दौरान सवाल हुए कि मिसेज कौल थीं कौन? जो अपने पति के सरनेम की वजह से जानी जाती थीं. फिर वो यानी मिसेज कौल वाजपेयी की साथी कैसे?
40 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी और राजकुमारी हकसर, ग्वालियर में विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) में पढ़ रहे थे. दोनों ने एक-दूसरे की भावनाएं समझीं. विभाजन के उस दौर में किसी लड़के और लड़की के बीच की दोस्ती को सराहा नहीं जाता था. वाजपेयी और मिसेज कौल भी इस स्थिति से गुजर रहे थे.
वाजपेयी ने अपनी भावनाओं का इजहार एक पत्र के माध्यम से किया, जिसे उन्होंने राजकुमारी के लिए लाइब्रेरी की एक किताब में रख दिया था. राजकुमारी ने भी ऐसे ही जवाब दिया, हालांकि उनका जवाब वाजपेयी तक पहुंचा ही नहीं. 
भारत विभाजन के दौरान राजकुमारी के कश्मीरी पंडित पिता गोविंद नारायण हकसर ने उनकी शादी कश्मीरी पंडित बृज नारायण कौल से कर दी.  दरअसल, हकसर अपनी बेटी की शादी एक शख्स नहीं करना चाहते थे, जो बाद में भारतीय राजनीति को बदलने वाला साबित हुआ. 
वाजपेयी और राजकुमारी हकसर, दोनीं अपनी जिंदगी में रम गए. बाद में मिसेज कौल पति के साथ दिल्ली चली गईं और वाजपेयी कानपुर से होते हुए लखनऊ पहुंच गए. मिसेज कौल के पति बीएन कौल, रामजस कॉलेज में प्रोफेसर थे और बाद में रामजस हॉस्टल में वार्डन भी बने.
कुछ सालों बाद अविवाहित वाजपेयी पूरी तरह से राजनेता बन गए.  एक लंबे वक्त के बाद दिल्ली में वाजपेयी का मिसेज कौल से मिलना हुआ. उस वक्त राजकुमारी कौल, बीएन कौल की पत्नी थीं. बीएन कौल उस वक्त हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के प्लान में रोड़ा बन जाते थे, जब वो शराब पीने के लिए देर से हॉस्टल आने की योजना बनाते थे. इस वक्त किसी ने मिसेज कौल को शिकायत करने का प्लान बनाया. जब हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का ग्रुप कौल के घर शिकायत करने पहुंचा तो कहा जाता है कि उस वक्त उनका सामना वाजपेयी से भी हुआ.
अगले कई सालों तक वाजपेयी, कौल के घर नियमित आने-जाने वालों में शामिल थे. बाद में वाजपेयी कौल हाउस में शिफ्ट हो गए जबकि उस वक्त तक प्रोफेसर कौल रामजस कॉलेज के वार्डन थे. लेकिन 1978 में अटल बिहारी वाजपेयी जब मोरारजी सरकार में विदेश मंत्री बने तो वे मिसेज कौल और उनकी बेटियों के साथ सरकारी आवास में शिफ्ट हो गए. उन्होंने कौल की बेटी नमिता और बाद में उनकी दोहिती निहारिका को गोद ले लिया.
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी हिंदुस्तान टाइम्स को एक इंटरव्यू में बताया था, 'हम वाजपेयी के पड़ोस में रहते थे. घरों की दीवार से लगा एक दरवाजा था, जिससे कि दोनों परिवार के लोग आसानी से आ-जा सके. वो मछली के शौकीन थे. नमिता अक्सर हमारे घर आती थी. मेरी पत्नी और मिसेज कौल की अच्छी बॉन्डिंग थी. जब नमिता की शादी तय हुई तो मेरी पत्नी ने तैयारी की थी, क्योंकि दूल्हा बंगाली था. बता दें कि नमिता की शादी रंजन भट्टाचार्य से हुई थी.
वाजपेयी की मिसेज कौल के साथ दोस्ती की चर्चा मीडिया में नहीं हुई. यह मीडिया और वाजपेयी के बीच एक अघोषित समझौता था, जिस पर न कभी मीडिया ने रुचि दिखाई और न ही वाजपेयी ने इस पर सफाई देने की जरूरत समझी. मिसेज कौल ने एक बार एक मैगजीन को इंटरव्यू दिया था.
इस इंटरव्यू उन्होंने कहा था, अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी दोस्ती को लेकर किसी को समझाने की जरूरत नहीं है. मिसेज कौल ने कहा, पति के साथ भी उनका रिश्ता काफी मजबूत है. बहरहाल, बहुत साल बाद जब मिसेज कौल का देहांत हुआ तो वाजपेयी बहुत बीमार थे और बिस्तर पर थे. वो उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे. लेकिन वाजपेयी के निधन के बाद नमिता ने ही उन्हें मुखाग्नि दी थी.

Monday, August 27, 2018

联合国气候谈判仍需各方努力

周的联合国气候谈判是各国在巴黎气候峰会之前完善协商文本的最终机会,尽管妥协势在必行,但各主要排放国并没有在开场白中明确表达意愿。

发达国家与发展中国家在确定排放量削减任务的主要承担者、加强气候融资的方法以及即将出台的巴黎协议的法律地位等主要问题上仍存在广泛分歧。如果各国无法在这些关键问题上取得突破,那么年底巴黎气候峰会可能只会通过一个软弱无力的协议,根本无法达成将全球平均气温上升控制在2摄氏度以内的目标。

联合国政府间气候变化专门委员会
在上一份报告中强调,为了达到2摄氏度的温控目标,全球温室气体排放量必须在下一个10年内达到峰值,并在之后急速下降。目前,各国提出的减排方案还远不能满足这一要求。

本周的谈判开始得并不顺利。作为77国集团加中国(G-77+China)等发展中国家谈判集团的主席,南非提出发达国家应在2020年之前完成减排目标,但这一时间安排远不是巴黎气候协议可能达成的。

中国与其他三大发展中经济体组成了基础四国(  )谈判集团。它表示,发达国家应履行后2020年计划中的一些基本承诺,其中不仅包括削减温室气体排放量,还应包含气候融资以及对发展中国家的技术转让问题。

削减(或减轻)排放量仍旧是许多国家担忧的主要问题。目前,57个国家(包括28个欧盟成员国)已向联合国提交了国家气候计划,但其提出的减排量远不能达到将气温上升控制在2摄氏度以内的目标。世界资源研究所(W 简称WRI)周二发表的对比研究发现,各国披露的信息质量存在着巨大的差异。

尽管联合国对减排幅度存在忧虑,但却很有信心目前各国提交的气候计划能够为巴黎气候协议打下基础,并确保发达及发展中国家未来逐步扩大减排规模。

《联合国气候变化框架公约》( )执行秘书长克里斯蒂安·菲格雷斯在本周谈判开始时的发言中说道,“在巴黎峰会之前,各国向联合国提交的国家自定贡献(      , 简称 )并不能达到控制全球变暖不超过2摄氏度的目标,但它们都强调了应果断舍弃“如常经营”的态度。如果各国政府能够坚定减排决心,制定更高的减排目标,那么自定贡献将会为终极目标的达成构建必要的基础。”

长达83页的协议草案中存在着大量的分歧,从而加深了发达国家对于技术协商落后于高层政治讨论的担忧。

融资

作为年底气候峰会的主办国,法国提出了多个向发展中国家注入气候资金的方案,试图推动气候融资,但融资问题仍旧是妨碍谈判顺利进行的一大阻碍。

2009年,时任美国国务卿希拉里·克林顿提出,美国将在2020年之前每年筹集1千亿美元的气候融资,但发展中国家对美国能否履行承诺表示怀疑。

发达国家一直表示气候融资应主要来自民间,但发展中国家坚持认为政府应加大对绿色气候基金(  d)等气候项目的资金投入,并且不应包括现有的海外援助。

 “单单靠会计账目上的弄虚作假和政治声明是不可能解决气候融资问题的。”法国气候行动网路( )的阿利克斯·马佐尼( )说道。他的话也反映了环境人士和最不发达国家日益加剧的愤怒,他们认为发达国家企图逃避责任,不履行之前作出的发展低碳能源、适应气候变化的承诺。

法律诉讼

由于联合国谈判缺乏进展,一些最易受到气候变化影响的国家,尤其是受海平面上升威胁的小岛屿国家已经决定采取法律手段,起诉那些开采或使用煤炭(通常被认为是造成全球变暖的罪魁祸首)的公司。

但是,参加波恩谈判的发达国家拒绝接受补偿条款,不愿对气候变化造成的损失和破坏进行补偿。他们担心一旦巴黎协议收录该条款,将会面临一大批诉讼请求。

此次联合国谈判恰逢全球商品价格跌至数年来的新低。一方面,这不禁让人期待,能源产业能够放缓投资,并且认识到随着政府加强对化石燃料的管制,其储备和资产的经济效益将会受到影响。

但另一方面,这也引起了一些人的忧虑,他们担心石油及煤炭价格的下跌会阻碍传统能源向可再生能源的转型。

Thursday, August 16, 2018

对当前经济形势、宏观政策及房地产走势的判断

日的政治局会议,研究当前经济工作,这个会议,一般被视为下半年宏观政策的风向标,因而备受关注。特别是在今年,经济运行出现诸多变局的情况下,政策如何调整变化,特别重要。根据会议通稿,以及我对当下中国经济和宏观政策的观察,有如下几点判断:
一、经济形势出现了一些明显的变化,“六稳”成为下半年核心目标。“会议指出,当前经济运行稳中有变,面临一些新问题新挑战,外部环境发生明显变化。”外部环境的变化,当然主要指中美贸易战对中国经济的挑战。实事求是而言,目前中国经济在心理层面受贸易战影响还是比较大,这是当前中国经济最大的变数,也是一段时间内影响中国经济的重要因素。而一些重要的指标如投资,消费向下的趋势比较明显,可以说,稳增长的任务比任何时候都严峻。会议指出,“要抓住主要矛针盾,采取对性强的措施加以解决。” 要做好“稳就业、稳金融、稳外贸、稳外资、稳投资、稳预期工作。”这“六稳”会成为下半年宏观政策的指挥部和核心目标,意味着稳经济的任务很重。也会出台针对性的举措,如“保护在华外资企业合法权益”
二、财政政策和货币政策出现“微调”。所谓“微调”是指从字面看,财政政策和货币政策都几乎维持稳定,但了解中国宏观政策的都知道,财政政策和货币政策的任何一个小的变动,其实在政策层面的影响和力度都不会小。会议虽然强调“坚持实施积极的财政政策和稳健的货币政策”,但关注重点应该是“提高政策的前瞻性、灵活性、有效性。”“财政政策要在扩大内需和结构调整上发挥更大作用。要把好货币供给总闸门,保持流动性合理充裕。”这意味着,在经历“央妈”和“财爹”的互怼后,财政政策也许会更加“积极”,着力点在“扩内需和调结构”,我的感觉,财政支出和减税都应是政策应有之义。至于货币政策,其实早在政治局会议之前变了,已经从保持流动性合理“稳定”变为“合理充裕”,因过度去杠杆引发的“钱荒”有望得到缓解,但很显然,管理层并不愿意再次打开水龙头哗哗哗。毕竟,宏观杠杆已经很高了,房价已经很高了,一些风险已经很大了。
三、投资将在“基建”和“乡村振兴”两个方面加码。会议特别提到,要“加大基础设施领域补短板的力度”。上半年投资增速6%,创近20年来的最低增速。基建投资大幅度滑坡是主要愿意。基建投资上半年增速只有7.2%,和过去2020%以上的年均增速比下滑太明显。除了清理 的影响,铁路投资下滑10.3%,也是主因。下半年,“铁公鸡”重出江湖,成为稳增长的重要力量的概率很大。另外,乡村振兴,应该会有一些标杆性的项目上马。
四、“去杠杆”虽然坚定,但更强调“力度和节奏”。站在中国经济当下的周期,去杠杆的大方向无疑是正确的,但是,我一直认为,去杠杆一是不能搞运动战,三年攻坚战的提法真的有待商榷;二是要深刻认识“去杠杆”的复杂性,去杠杆可谓经济领域最具技术含量的政策,如果把握不好节奏,“去杠杆”造成的后果可能比杠杆本身都可怕,去杠杆要有耐心。“协调好各项政策出台时机”的提法无疑是给去杠杆政策打补丁。但去杠杆的大方向不会改变。
五、改革开放层面会有新举措。会议提出“继续研究推出一批管用见效的重大改革举措。”,改革开放既是中国经济长期内在需要,也是当下应对复杂国际环境,应对贸易战的需要。笔者预计主要会在金融开放、扩大进口,以及“一带一路”战略层面发力。
六、房地产政策其实没“新意”。会议在房地产政策上用词非常严厉,体现在两点:一是提出“下决心解决好房地产市场问题”,二是提出“坚决遏制房价上涨”。过去的政策目标都是遏制房价“过快上涨”,而这次是“遏制房价上涨”,意思是房价不能再涨了。其实,我的判断,即使会议不出台针对房地产的任何政策,房价短期不是上涨的压力大,而是下行的压力大。这是房地产真正的基本面。在经历2015以来近3年的上涨周期后,房地产从一线到八线城市的需求得到了淋漓尽致的释放,从一线到八线城市的房价,除了少数城市,短期基本都处在高位,市场自然向下的概率远远高于向上的概率,房价下一个上涨周期到来还需要时间,需要政策和市场环境。特别是,随着去库存政策和棚改货币化政策的逐渐退出,推动房价上涨的最主要推手都泄劲,这个时候做到不让房价“上涨”其实是可以做到的。我个人判断,房价在各种预期的改变下,其实已经进入到微妙的调整周期。至于各地出现“抢房”的闹剧,现在大家也明白是怎么回事了。难道没有人发现,市场突然进入到“静默期”吗?有点意思。